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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
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धृतराष्ट्र उवाच
उचितं नः कुले तात सर्वेषां भरतर्षभ |  २१   क
पुत्रेष्वैश्वर्यमाधाय़ वय़सोऽन्ते वनं नृप ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति