विराट पर्व  अध्याय १

युधिष्ठिर उवाच

मत्स्यो विराटो वलवानभिरक्षेत्स पाण्डवान् |  १३   क
धर्मशीलो वदान्यश्च वृद्धश्च सुमहाधनः ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति