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मौसल पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो देवैरृषिभिश्चापि कृष्णः; समागतश्चारणैश्चैव राजन् |  २४   क
गन्धर्वाग्र्यैरप्सरोभिर्वराभिः; सिद्धैः साध्यैश्चानतैः पूज्यमानः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति