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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनसहाय़ाश्च राक्षसाः परिकीर्तिताः |  २३   क
प्राप्तास्ते क्रमशो राजन्सर्वलोकाननुत्तमान् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति