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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
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जनमेजय़ उवाच
कर्णपुत्राश्च विक्रान्ता राजा चैव जय़द्रथः |  ३   क
घटोत्कचादय़श्चैव ये चान्ये नानुकीर्तिताः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति