स्वर्गारोहण पर्व  अध्याय ५

सूत उवाच

सर्वज्ञेन विधिज्ञेन धर्मज्ञानवता सता |  ३२   क
अतीन्द्रिय़ेण शुचिना तपसा भावितात्मना ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति