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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
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सूत उवाच
ऊर्ध्ववाहुर्विरौम्येष न च कश्चिच्छृणोति मे |  ४९   क
धर्मादर्थश्च कामश्च स किमर्थं न सेव्यते ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति