सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिदन्धांश्च मूकांश्च पङ्गून्व्यङ्गानवान्धवान् |  ११३   क
पितेव पासि धर्मज्ञ तथा प्रव्रजितानपि ||  ११३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति