सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिदात्मानमन्वीक्ष्य परांश्च जय़तां वर |  १२   क
तथा सन्धाय़ कर्माणि अष्टौ भारत सेवसे ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति