सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिदर्थान्विनिश्चित्य लघुमूलान्महोदय़ान् |  २०   क
क्षिप्रमारभसे कर्तुं न विघ्नय़सि तादृशान् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति