सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

अमात्यानुपधातीतान्पितृपैतामहाञ्शुचीन् |  ३३   क
श्रेष्ठाञ्श्रेष्ठेषु कच्चित्त्वं निय़ोजय़सि कर्मसु ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति