सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिच्छारीरमावाधमौषधैर्निय़मेन वा |  ७९   क
मानसं वृद्धसेवाभिः सदा पार्थापकर्षसि ||  ७९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति