सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिदाचरितां पूर्वैर्नरदेव पितामहैः |  ८   क
वर्तसे वृत्तिमक्षीणां धर्मार्थसहितां नृषु ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति