सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

पृष्टो गृहीतस्तत्कारी तज्ज्ञैर्दृष्टः सकारणः |  ९४   क
कच्चिन्न मुच्यते स्तेनो द्रव्यलोभान्नरर्षभ ||  ९४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति