वन पर्व  अध्याय ५

वैशम्पाय़न उवाच

एतावदुक्त्वा धृतराष्ट्रोऽन्वपद्य; दन्तर्वेश्म सहसोत्थाय़ राजन् |  २०   क
नेदमस्तीत्यथ विदुरो भाषमाणः; सम्प्राद्रवद्यत्र पार्था वभूवुः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति