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विराट पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्वादश वर्षाणि प्रवेष्टव्यं वनं पुनः |  ११   क
एकस्मिन्नपि विज्ञाते प्रतिज्ञातं हि नस्तथा ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति