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विराट पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
येन वीरः कुरुक्षेत्रमभ्यरक्षत्परन्तपः |  १८   क
अमुञ्चद्धनुषस्तस्य ज्यामक्षय़्यां युधिष्ठिरः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति