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विराट पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
यत्र चापश्यत स वै तिरो वर्षाणि वर्षति |  २६   क
तत्र तानि दृढैः पाशैः सुगाढं पर्यवन्धत ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति