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विराट पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
विध्यन्तो मृगजातानि महेष्वासा महावलाः |  ३   क
उत्तरेण दशार्णांस्ते पाञ्चालान्दक्षिणेन तु ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति