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विराट पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो जनपदं प्राप्य कृष्णा राजानमव्रवीत् |  ५   क
पश्यैकपद्यो दृश्यन्ते क्षेत्राणि विविधानि च ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति