द्रोण पर्व  अध्याय ५

कर्ण उवाच

सर्व एव महात्मान इमे पुरुषसत्तमाः |  १२   क
सेनापतित्वमर्हन्ति नात्र कार्या विचारणा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति