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विराट पर्व
अध्याय ३२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो राजन्नाशुकारी कुन्तीपुत्रो वृकोदरः |  २८   क
समासाद्य सुशर्माणमश्वानस्य व्यपोथय़त् ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति