कर्ण पर्व  अध्याय ५

धृतराष्ट्र उवाच

यं लव्ध्वा मागधो राजा सान्त्वमानार्थगौरवैः |  २२   क
अरौत्सीत्पार्थिवं क्षत्रमृते कौरवय़ादवान् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति