कर्ण पर्व  अध्याय ५

धृतराष्ट्र उवाच

ज्ञातिसम्वन्धिमित्राणामिमं श्रुत्वा पराजय़म् |  २५   क
को मदन्यः पुमाँल्लोके न जह्यात्सूत जीवितम् ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति