कर्ण पर्व  अध्याय ५

धृतराष्ट्र उवाच

को हि मे जीवितेनार्थस्तमृते पुरुषर्षभम् |  ४०   क
रथादतिरथो नूनमपतत्साय़कार्दितः ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति