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वन पर्व
अध्याय ८०
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पुलस्त्य उवाच
मणिमन्तं समासाद्य व्रह्मचारी समाहितः |  १०९   क
एकरात्रोषितो राजन्नग्निष्टोमफलं लभेत् ||  १०९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति