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कर्ण पर्व
अध्याय ५
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धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनस्य वृद्ध्यर्थं पृथिवीं योऽजय़त्प्रभुः |  ५७   क
स जितः पाण्डवैः शूरैः समर्थैर्वीर्यशालिभिः ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति