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कर्ण पर्व
अध्याय ५
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धृतराष्ट्र उवाच
व्राह्मणाः क्षत्रिय़ा वैश्या यस्य शिक्षामुपासते |  ९५   क
धनुर्वेदं चिकीर्षन्तो द्रोणपुत्रस्य धीमतः ||  ९५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति