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कर्ण पर्व
अध्याय ५
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धृतराष्ट्र उवाच
युवा रूपेण सम्पन्नो दर्शनीय़ो महाय़शाः |  ९६   क
अश्वत्थामा हते कर्णे किमभाषत सञ्जय़ ||  ९६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति