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शान्ति पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो रामस्य तत्कर्म श्रुत्वा राजा युधिष्ठिरः |  १   क
विस्मय़ं परमं गत्वा प्रत्युवाच जनार्दनम् ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति