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शान्ति पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
त्वं हि देवान्सगन्धर्वान्ससुरासुरराक्षसान् |  २५   क
शक्त एकरथेनैव विजेतुं नात्र संशय़ः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति