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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
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व्रह्मो उवाच
तस्मात्कर्मसु निःस्नेहा ये केचित्पारदर्शिनः |  ३२   क
विद्यामय़ोऽय़ं पुरुषो न तु कर्ममय़ः स्मृतः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति