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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
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अर्जुन उवाच
को न्वसौ व्राह्मणः कृष्ण कश्च शिष्यो जनार्दन |  ४४   क
श्रोतव्यं चेन्मय़ैतद्वै तत्त्वमाचक्ष्व मे विभो ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति