सभा पर्व  अध्याय ५०

दुर्योधन उवाच

जन्मवृद्धिमिवार्थानां यो वृद्धिमभिकाङ्क्षते |  २६   क
एधते ज्ञातिषु स वै सद्योवृद्धिर्हि विक्रमः ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति