वन पर्व  अध्याय ६१

दमय़न्त्यु उवाच

नलो नामारिदमनः पुण्यश्लोक इति श्रुतः |  ४७   क
व्रह्मण्यो वेदविद्वाग्मी पुण्यकृत्सोमपोऽग्निचित् ||  ४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति