उद्योग पर्व  अध्याय ५२

धृतराष्ट्र उवाच

त्वमेव हि पराक्रान्तानाचक्षीथाः परान्मम |  २   क
पाञ्चालान्केकय़ान्मत्स्यान्मागधान्वत्सभूमिपान् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति