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सभा पर्व
अध्याय ७२
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धृतराष्ट्र उवाच
तस्याः पार्थाः परिक्लेशं न क्षंस्यन्तेऽत्यमर्षणाः |  २९   क
वृष्णय़ो वा महेष्वासाः पाञ्चाला वा महौजसः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति