वन पर्व  अध्याय ५०

वृहदश्व उवाच

तं स भीमः प्रजाकामस्तोषय़ामास धर्मवित् |  ७   क
महिष्या सह राजेन्द्र सत्कारेण सुवर्चसम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति