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विराट पर्व
अध्याय ५०
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अर्जुन उवाच
यस्य तारार्कचित्रोऽसौ रथे ध्वजवरः स्थितः |  १८   क
यस्यैतत्पाण्डुरं छत्रं विमलं मूर्ध्नि तिष्ठति ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति