विराट पर्व  अध्याय ५०

अर्जुन उवाच

हैमं चन्द्रार्कसङ्काशं कवचं यस्य दृश्यते |  २०   क
जातरूपशिरस्त्राणस्त्रासय़न्निव मे मनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति