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विराट पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
आस्थाय़ रुचिरं जिष्णो रथं सारथिना मय़ा |  ३   क
कतमद्यास्यसेऽनीकमुक्तो यास्याम्यहं त्वय़ा ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति