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उद्योग पर्व
अध्याय ५०
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धृतराष्ट्र उवाच
प्रभिन्न इव मातङ्गः प्रभञ्जन्पुष्पितान्द्रुमान् |  ३३   क
प्रवेक्ष्यति रणे सेनां पुत्राणां मे वृकोदरः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति