उद्योग पर्व  अध्याय ५०

धृतराष्ट्र उवाच

अमर्षणश्च कौन्तेय़ो दृढवैरश्च पाण्डवः |  ५   क
अनर्महासी सोन्मादस्तिर्यक्प्रेक्षी महास्वनः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति