उद्योग पर्व  अध्याय ५०

धृतराष्ट्र उवाच

शैक्याय़समय़ीं घोरां गदां काञ्चनभूषिताम् |  ८   क
मनसाहं प्रपश्यामि व्रह्मदण्डमिवोद्यतम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति