सभा पर्व  अध्याय १३

श्रीकृष्ण उवाच

भगदत्तो महाराज वृद्धस्तव पितुः सखा |  १४   क
स वाचा प्रणतस्तस्य कर्मणा चैव भारत ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति