menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
सूर्ये चास्तमनुप्राप्ते रजसा चाभिसंवृते |  ४८   क
नाज्ञाय़त तदा शत्रुर्न सुहृन्न च किञ्चन ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति