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विराट पर्व
अध्याय ८
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सुदेष्णो उवाच
यश्च त्वां सततं पश्येत्पुरुषश्चारुहासिनि |  २५   क
एवं सर्वानवद्याङ्गि स चानङ्गवशो भवेत् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति