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भीष्म पर्व
अध्याय ५०
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सञ्जय़ उवाच
न हि पाञ्चालराजस्य लोके कश्चन विद्यते |  ८६   क
भीमसात्यकय़ोरन्यः प्राणेभ्यः प्रिय़कृत्तमः ||  ८६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति