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भीष्म पर्व
अध्याय ५०
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सञ्जय़ उवाच
स कृत्वा कदनं तत्र प्रगृहीतशरासनः |  ९३   क
आस्थितो रौद्रमात्मानं जघान समरे परान् ||  ९३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति