menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
तन्त्रीस्वनसुखं रम्यं पुंस्कोकिलसमध्वनिम् |  ३४   क
अशृण्वतः स्वनं तस्य का शान्तिर्हृदय़स्य मे ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति